Wednesday, July 17, 2013

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मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम समय-समय पर लक्ष्मण, सीता और हनुमान जी को खुशहाल जीवन जीने के बारे में उपदेश दिया करते थे। इसी सिलसिले में एक दिन उन्होंने कहा, जगत में सत्य ही ईश्वर है।

धर्म की स्थिति सत्य के आधार पर टिकी रहती है। सत्य से बढ़कर दूसरा कोई पुण्य कार्य नहीं है। दान, यज्ञ, होम, तपस्या और वेद सबका आश्रय सत्य है, अतः सत्यपरायण होना चाहिए।


मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम समय-समय पर लक्ष्मण, सीता और हनुमान जी को खुशहाल जीवन जीने के बारे में उपदेश दिया करते थे। इसी सिलसिले में एक दिन उन्होंने कहा, जगत में सत्य ही ईश्वर है।

धर्म की स्थिति सत्य के आधार पर टिकी रहती है। सत्य से बढ़कर दूसरा कोई पुण्य कार्य नहीं है। दान, यज्ञ, होम, तपस्या और वेद सबका आश्रय सत्य है, अतः सत्यपरायण होना चाहिए।


मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम समय-समय पर लक्ष्मण, सीता और हनुमान जी को खुशहाल जीवन जीने के बारे में उपदेश दिया करते थे। इसी सिलसिले में एक दिन उन्होंने कहा, जगत में सत्य ही ईश्वर है।

धर्म की स्थिति सत्य के आधार पर टिकी रहती है। सत्य से बढ़कर दूसरा कोई पुण्य कार्य नहीं है। दान, यज्ञ, होम, तपस्या और वेद सबका आश्रय सत्य है, अतः सत्यपरायण होना चाहिए।

राजा के धर्म पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सत्य का पालन करना और प्रजा के लिए स्नेह एवं सद्भाव बनाए रखना राजा का प्रधान कर्म है। सत्य ही संपूर्ण जगत में प्रतिष्ठित है, इसलिए समस्त धर्मशास्त्रों व ऋषि-मुनियों ने सत्य पर अटल रहने की प्रेरणा दी है।

जगज्जननी सीता को संबोधित करते हुए प्रभु कहते हैं, हे सीते, माता-पिता और गुरु प्रत्यक्ष देवता हैं। इनकी अवहेलना कर अदृश्य देवताओं की आराधना लाभकारी कैसे हो सकती है? जिनकी सेवा से अर्थ, धर्म और मोक्ष, तीनों की प्राप्ति होती है, उन माता-पिता के समान इस संसार में दूसरा कोई भी नहीं है।

जो माता-पिता और आचार्यों (विद्वानों) का अपमान करता है, वह पाप का फल भोगता है और इहलोक एवं परलोक, कहीं का नहीं रहता। आसक्ति त्यागने की प्रेरणा देते हुए प्रभु श्रीराम कहते हैं, जीवन सदा उनके वश में होता है, जो सत्य पर अटल रहते हैं। इसलिए हर क्षण काल को याद रखते हुए सत्कर्मों में लीन रहना चाहिए।
सनातनी पंरपरा का लोकप्रिय त्योहार रक्षाबंधन इस बार भद्रा के फेर में फंस गया है। काशी के पंडितों के अनुसार 20 अगस्त को 10 बजकर 22 मिनट पर पूर्णिमा तिथि शुरू होगी इसके साथ ही भद्रा भी शुरू हो जाएगा। शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। भद्रा के कारण रक्षाबंधन समेत अन्य शुभ कार्यों पर भी असर पड़ेगा।



20 तारीख को 3 बजकर 30 मिनट से 4 बजकर 28 मिनट भद्रा पुच्छ रहेगा। विशेष परिस्थिति में इस समय राखी का त्योहार मनाया जा सकता है।
सनातनी पंरपरा का लोकप्रिय त्योहार रक्षाबंधन इस बार भद्रा के फेर में फंस गया है। काशी के पंडितों के अनुसार 20 अगस्त को 10 बजकर 22 मिनट पर पूर्णिमा तिथि शुरू होगी इसके साथ ही भद्रा भी शुरू हो जाएगा। शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। भद्रा के कारण रक्षाबंधन समेत अन्य शुभ कार्यों पर भी असर पड़ेगा।

ऐसे में भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए व्रत रहने वाली बहनों को पूर्णिमा के भद्रा मुक्त होने का इंतजार करना पड़ेगा। 20 तारीख की रात साढ़े आठ बजे भद्रा समाप्त हो जाएगा। इसके बाद बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। लेकिन सूर्योस्त के बाद राखी बांधना भी शास्त्रानुसार उचित नहीं है, ऐसे में बहनों के लिए उलझन है कि वो अपने भैया की कलाई पर राखी कब बांधे।

महावीर पंचांग के संपादक पं. रामेश्वर ओझा के मुताबिक रक्षाबंधन का त्योहार पूर्णिमा तिथि में मनाया जाता है। 21 तारीख की सुबह 7 बजकर 25 मिनट तक पूर्णिमा तिथि रहेगी। इसलिए बहनों के लिए उचित होगा कि 21 तारीख की सुबह भद्रा मुक्त समय में भाईयों की कलाई पर राखी बांधे। जो लोग भगवान को राखी बांधते हैं उन्हें 21 तारीख की सुबह 7.25 तक भगवान का पूजन और रक्षासूत्र बांधना होगा।

20 तारीख को 3 बजकर 30 मिनट से 4 बजकर 28 मिनट भद्रा पुच्छ रहेगा। विशेष परिस्थिति में इस समय राखी का त्योहार मनाया जा सकता है।
सनातनी पंरपरा का लोकप्रिय त्योहार रक्षाबंधन इस बार भद्रा के फेर में फंस गया है। काशी के पंडितों के अनुसार 20 अगस्त को 10 बजकर 22 मिनट पर पूर्णिमा तिथि शुरू होगी इसके साथ ही भद्रा भी शुरू हो जाएगा। शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। भद्रा के कारण रक्षाबंधन समेत अन्य शुभ कार्यों पर भी असर पड़ेगा।

ऐसे में भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए व्रत रहने वाली बहनों को पूर्णिमा के भद्रा मुक्त होने का इंतजार करना पड़ेगा। 20 तारीख की रात साढ़े आठ बजे भद्रा समाप्त हो जाएगा। इसके बाद बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। लेकिन सूर्योस्त के बाद राखी बांधना भी शास्त्रानुसार उचित नहीं है, ऐसे में बहनों के लिए उलझन है कि वो अपने भैया की कलाई पर राखी कब बांधे।

महावीर पंचांग के संपादक पं. रामेश्वर ओझा के मुताबिक रक्षाबंधन का त्योहार पूर्णिमा तिथि में मनाया जाता है। 21 तारीख की सुबह 7 बजकर 25 मिनट तक पूर्णिमा तिथि रहेगी। इसलिए बहनों के लिए उचित होगा कि 21 तारीख की सुबह भद्रा मुक्त समय में भाईयों की कलाई पर राखी बांधे। जो लोग भगवान को राखी बांधते हैं उन्हें 21 तारीख की सुबह 7.25 तक भगवान का पूजन और रक्षासूत्र बांधना होगा।

20 तारीख को 3 बजकर 30 मिनट से 4 बजकर 28 मिनट भद्रा पुच्छ रहेगा। विशेष परिस्थिति में इस समय राखी का त्योहार मनाया जा सकता है।

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બિહારના સારણ જીલ્લામાં છાપરા ગામની એક સરકારી શાળામાં મધ્યાન્હ ભોજન માં પીરસવામાં આવેલી ખીચડી ખાધા પછી બાવીસ બાળકોના મોત નીપજ્યા છે . બિહારના શિક્ષણમંત્રીએ ગઈકાલે આ આખા બનાવની નૈતિક જવાબદારી લઈને ભોજનમાં ઝેર નાખવામાં આવ્યું હોવાનો સનસનીખેજ આરોપ પણ ગઈકાલે મીડિયા સમક્ષ કર્યો હતો . આ બનાવમાં શાળાની એક શિક્ષિકા ઉપર શંકાની સોય તાકીને એના ઉપર સરકારે પોલીસ ફરિયાદ પણ દાખલ કરી દીધી છે . બિહારના શિક્ષણમંત્રી નું કહેવું છે કે શિક્ષિકાના પતિ તથા તેનો એક કૌટુંબિક સગો એક ચોક્કસ રાજકીય પક્ષ સાથે જોડાયેલો છે, અને બિહાર સરકારને બદનામ કરવા માટે તેમણે આ શિક્ષિકા ને હાથો બનાવીને બાળકોને પીરસવામાં આવેલા ભોજનમાં ઝેર નાખ્યું છે . હવે તપાસ પછી જવાબદાર જે હોય તે, પણ મધ્યાન્હ ભોજન વ્યવસ્થાના છીંડા બહાર આવી ગયા છે .
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